स्मृति एक सामान्य पद है जिससे तात्पर्य पूर्व अनुभूतियों की मस्तिष्क में इकट्ठा कर रखने की क्षमता होती है। इस के 2 पक्ष होते हैं- धनात्मक तथा ऋण आत्मक पक्ष । स्मृति के धनात्मक पक्ष से तात्पर्य पूर्व अनुभूतियों को याद करके रखने से होता है तथा ऋण आत्मक पक्ष में तात्पर्य उन अनुभूतियों को याद करने की असमर्थता से होता है। अतः यह कहा जा सकता है कि समिति का धनात्मक पक्ष स्मरण तथा ऋण आत्मक पक्ष विस्मरण है।

मनोवैज्ञानिको ने स्मृति के तीन तत्व या अवस्थाओं का वर्णन किया है जो निम्नलिखित है---
1. संकेतिकी (Encoding)-- सूचनाओं का स्मृति में प्रवेश । 2. संचयन(Storage)-- सूचनाओं को कुछ समय के तक संचित करना। 3. पुनः प्राप्ति(Retrieval)-- संचयन से सुचनाओं को वापस लेना।
स्मृति के प्रकार(Types of Memory)--
1. संवेदी स्मृति(Sensory memory)
2. लघुकालीन स्मृति(Short-term memory)
3. चलन स्मृति(Working memory)
4.दीर्यकालीन स्मृति( Long-term memory)
1. संवेदी स्मृति(Sensory memory)-संवेदी स्मृति वैसे स्मृति संचयन को कहा जाता है। जिसमें सुचनाओं को सामान्यतः एक सेकंड या उससे कम अवधि के लिए व्यक्ति रख पाता है। इस स्मृति में उद्दीपक से मिलने वाली सुचनाओ को मौलिक रूप में अर्थात् उसमें बिना किसी तरह के फेरबदल किये ही उन्हें संचित रखा जाता है। संवेदी स्मृति के कारण ही व्यक्ति के सामने से उद्दीपक के हट जाने के बाद भी उसका चिन्ह थोड़े समय के लिए मस्तिष्क में बना रहता है।इसलिए इसे संवेदी संचयन या संवेदी रजिस्टर भी कहा जाता है।यह दो प्रकार की होती है - प्रतिचित्रात्मक(Iconic memory) तथा प्रतिध्वनिक स्मृति( Echoic memory), प्रतिचित्रात्मक मैं व्यक्ति देखे गए वस्तु या व्यक्ति के बारे में 1 सेकंड तक एक दृष्टि चिह्न रख पाता है। जबकि प्रतिध्वनि की स्मृति में व्यक्ति किसी सुनी हुई आवाज उद्दीपक का श्रवण चिह्न ने अपने मन में 1 सेकेंड से अधिक समय के लिए रख पाता है ।
2.लघुकालीन स्मृति-(Short-term memory)- लघु कालीन स्मृति को विलियम जेम्स ने प्राथमिक स्मृति भी कहा है।इस तरह की स्मृति की दो मुख्य विशेषताएं हैं -पहला STM मेंकिसी सूचना को अधिक से अधिक 20 या 30 सेकंड तक संचित करके रखा जा सकता है तथा इसमें प्रवेश पाने वाली सूचनाएं कमजोर प्रकृति की होती हैं क्योंकि उन्हें व्यक्ति मात्र 1 या 2 प्रयास में ही सीख लिया होता है।जैसे मान लिया जाए की कोई व्यक्ति अपरिचित से टेलीफोन पर बात करने के लिए टेलीफोन का नंबर टेलीफोन डायरी से लेकर उसके पास डायल करता है और व्यस्त संकेत पाकर 15 सेकंड रुक कर पुनः डायल करना चाहता है। परंतु इस बार वह नंबर के सही कर्म को थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि वह भूल जाता है।इस उदाहरण में लघु अवधि समृति 15 सेकंड का दिखाया गया है तथा उस अपरिचित टेलीफोन नंबर को भी मात्र एक ही अभ्यास में सिखाया गया था। उक्त उदाहरण से यह स्पष्ट है कि STM में मात्र वैसी समृति सूचनाएं होती हैं जीने वर्तमान समय में व्यक्ति से संचित करके रखता है ।
3. चलन स्मृति(Working memory)-इस संप्रत्यय का प्रतिपादन ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक एलान बेडोली(2003) ने किया है। चलन स्मृति भी लघु कालीन समृति के समान एक सीमित क्षमता वाली समृति होती है परंतु अंतर यह है कि यहां लघु कालीन स्मृति के समान सिर्फ सूचनाओं को निष्क्रिय रूप से संचित ही नहीं किया जाता है बल्कि इन संचित सूचनाओं को संसाधित भी किया जाता है। सचमुच में चलन स्मृति एक तरह का मानसिक वर्क बेंच है जिस पर सूचनाओं में जोड़-तोड़ किया जाता है उन्हें संग्रहित करके भाषा को समझने की कोशिश की जाती है कुछ निर्णय लिए जाते हैं तथा समस्या समाधान किया जाता है। अतः नाइबर्ग (2002) ने कहा है कि चलन स्मृति एक सक्रिय समृति तंत्र है न की लघु कालीन समिति के समान सूचनाओं को संचित करने वाला एक निष्क्रिय समृति तंत्र है। सचमुच में जब STM अन्य मानसिक प्रक्रियाओं दोबारा संयोजित हो जाता है ,तो यहां से चलन स्मृति का क्षेत्र पर आरंभ हो जाता है जहां व्यक्ति कई तरह से चिंतन आरंभ कर देता है। जब व्यक्ति कुछ सोच रहा होता है या समस्या का समाधान कर रहा होता है तो उस समय उसका चलन स्मृति सक्रिय होती है।
4.दीर्घकालीन स्मृति (Long-term memory)--विलियम जेम्स ने इसे गोन स्मृति भी कहा है। इस तरह की स्मृति में किसी सूचनाओं को व्यक्ति कम से कम 30 सेकंड तो अवश्य ही धारण करके रखता है। अधिक से अधिक कितने समय के लिए सूचना को यहां संचित रखा जा सकता है,इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है। संभव है कि किसी सूचना को पूरे जीवन काल तक संचित रखा जा सकता हो या किसी को मात्र 1 घंटे तक ही संचित रखा जा सकता हो। जब कोई छात्र कल शिक्षक द्वारा वर्ग में दिए व्याख्यान का प्रत्याहान कर सकने में सफल हो पाता है,तो यह कहा जाता है कि व्याख्यान का विषय दीर्घकालीन समिति में संचित था।

मनोवैज्ञानिको ने स्मृति के तीन तत्व या अवस्थाओं का वर्णन किया है जो निम्नलिखित है---
1. संकेतिकी (Encoding)-- सूचनाओं का स्मृति में प्रवेश । 2. संचयन(Storage)-- सूचनाओं को कुछ समय के तक संचित करना। 3. पुनः प्राप्ति(Retrieval)-- संचयन से सुचनाओं को वापस लेना।
स्मृति के प्रकार(Types of Memory)--
1. संवेदी स्मृति(Sensory memory)
2. लघुकालीन स्मृति(Short-term memory)
3. चलन स्मृति(Working memory)
4.दीर्यकालीन स्मृति( Long-term memory)
1. संवेदी स्मृति(Sensory memory)-संवेदी स्मृति वैसे स्मृति संचयन को कहा जाता है। जिसमें सुचनाओं को सामान्यतः एक सेकंड या उससे कम अवधि के लिए व्यक्ति रख पाता है। इस स्मृति में उद्दीपक से मिलने वाली सुचनाओ को मौलिक रूप में अर्थात् उसमें बिना किसी तरह के फेरबदल किये ही उन्हें संचित रखा जाता है। संवेदी स्मृति के कारण ही व्यक्ति के सामने से उद्दीपक के हट जाने के बाद भी उसका चिन्ह थोड़े समय के लिए मस्तिष्क में बना रहता है।इसलिए इसे संवेदी संचयन या संवेदी रजिस्टर भी कहा जाता है।यह दो प्रकार की होती है - प्रतिचित्रात्मक(Iconic memory) तथा प्रतिध्वनिक स्मृति( Echoic memory), प्रतिचित्रात्मक मैं व्यक्ति देखे गए वस्तु या व्यक्ति के बारे में 1 सेकंड तक एक दृष्टि चिह्न रख पाता है। जबकि प्रतिध्वनि की स्मृति में व्यक्ति किसी सुनी हुई आवाज उद्दीपक का श्रवण चिह्न ने अपने मन में 1 सेकेंड से अधिक समय के लिए रख पाता है ।
2.लघुकालीन स्मृति-(Short-term memory)- लघु कालीन स्मृति को विलियम जेम्स ने प्राथमिक स्मृति भी कहा है।इस तरह की स्मृति की दो मुख्य विशेषताएं हैं -पहला STM मेंकिसी सूचना को अधिक से अधिक 20 या 30 सेकंड तक संचित करके रखा जा सकता है तथा इसमें प्रवेश पाने वाली सूचनाएं कमजोर प्रकृति की होती हैं क्योंकि उन्हें व्यक्ति मात्र 1 या 2 प्रयास में ही सीख लिया होता है।जैसे मान लिया जाए की कोई व्यक्ति अपरिचित से टेलीफोन पर बात करने के लिए टेलीफोन का नंबर टेलीफोन डायरी से लेकर उसके पास डायल करता है और व्यस्त संकेत पाकर 15 सेकंड रुक कर पुनः डायल करना चाहता है। परंतु इस बार वह नंबर के सही कर्म को थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि वह भूल जाता है।इस उदाहरण में लघु अवधि समृति 15 सेकंड का दिखाया गया है तथा उस अपरिचित टेलीफोन नंबर को भी मात्र एक ही अभ्यास में सिखाया गया था। उक्त उदाहरण से यह स्पष्ट है कि STM में मात्र वैसी समृति सूचनाएं होती हैं जीने वर्तमान समय में व्यक्ति से संचित करके रखता है ।
3. चलन स्मृति(Working memory)-इस संप्रत्यय का प्रतिपादन ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक एलान बेडोली(2003) ने किया है। चलन स्मृति भी लघु कालीन समृति के समान एक सीमित क्षमता वाली समृति होती है परंतु अंतर यह है कि यहां लघु कालीन स्मृति के समान सिर्फ सूचनाओं को निष्क्रिय रूप से संचित ही नहीं किया जाता है बल्कि इन संचित सूचनाओं को संसाधित भी किया जाता है। सचमुच में चलन स्मृति एक तरह का मानसिक वर्क बेंच है जिस पर सूचनाओं में जोड़-तोड़ किया जाता है उन्हें संग्रहित करके भाषा को समझने की कोशिश की जाती है कुछ निर्णय लिए जाते हैं तथा समस्या समाधान किया जाता है। अतः नाइबर्ग (2002) ने कहा है कि चलन स्मृति एक सक्रिय समृति तंत्र है न की लघु कालीन समिति के समान सूचनाओं को संचित करने वाला एक निष्क्रिय समृति तंत्र है। सचमुच में जब STM अन्य मानसिक प्रक्रियाओं दोबारा संयोजित हो जाता है ,तो यहां से चलन स्मृति का क्षेत्र पर आरंभ हो जाता है जहां व्यक्ति कई तरह से चिंतन आरंभ कर देता है। जब व्यक्ति कुछ सोच रहा होता है या समस्या का समाधान कर रहा होता है तो उस समय उसका चलन स्मृति सक्रिय होती है।
4.दीर्घकालीन स्मृति (Long-term memory)--विलियम जेम्स ने इसे गोन स्मृति भी कहा है। इस तरह की स्मृति में किसी सूचनाओं को व्यक्ति कम से कम 30 सेकंड तो अवश्य ही धारण करके रखता है। अधिक से अधिक कितने समय के लिए सूचना को यहां संचित रखा जा सकता है,इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है। संभव है कि किसी सूचना को पूरे जीवन काल तक संचित रखा जा सकता हो या किसी को मात्र 1 घंटे तक ही संचित रखा जा सकता हो। जब कोई छात्र कल शिक्षक द्वारा वर्ग में दिए व्याख्यान का प्रत्याहान कर सकने में सफल हो पाता है,तो यह कहा जाता है कि व्याख्यान का विषय दीर्घकालीन समिति में संचित था।
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