सवाल ये है कि जिस देश में 3 लाख से ज्यादा मस्जिदें हैं, वहां कुछ लोगों को मंदिर में नमाज पढ़ने की क्या जरूरत थी? जिन लोगों ने नंदबाबा मंदिर में नमाज पढ़ी उनका कहना है कि उन्होंने मंदिर प्रशासन से इसकी इजाजत ली थी और उनका मकसद दोनों समुदायों के बीच सद्भाव बढ़ाना था.
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